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आज देश-दुनिया में हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है। इस मौक़े पर भारत के भीतर एक सुखद आश्चर्य से भर देने वाली आयी है जो हिन्दी के लेखकों के लिए किसी बहुत बड़े तोहफ़े जैसा है। जी हाँ, ज़रा सोचिये जहाँ भारत में अभी बड़े-बड़े प्रकाशक भी अपने हिन्दी लेखकों को ढंग की रॉयल्टी नहीं देते वहीं एक प्रकाशक ऐसा भी है जो अपने हिन्दी लेखकों को एडवांस में रॉयल्दी देने देने जा रहा है। दरअसल, हिंद युग्म ने अपने चर्चित लेखकों को उनकी मौजूदा किताबों के ऑडियो बुक अधिकारों के लिए कुल मिलाकर 11 लाख रुपयों की अग्रिम रॉयल्टी देने की घोषणा की है। इन लेखकों में सत्य व्यास, दिव्य प्रकाश दुबे, निखिल सचान, अनु सिंह चौधरी, मानव कौल, किशोर चौधरी, अजीत भारती, आशीष चौधरी, अंकिता जैन और उमेश पंत जैसे युवा लेखक शामिल हैं।
आपको बता दें कि हिंद युग्म ने हाल ही में अमेज़ॉन की ऑडियो बुक निर्माण एवं प्रकाशन कंपनी ऑडिबल के साथ अपनी किताबों को ऑडियो में बदलने का करार किया है। हिंद युग्म ने ऑडियो-किताब बेचने और बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी ऑडिबल के साथ अपनी नवंबर 2017 तक प्रकाशित किताबों को ऑडियो रूप में बदलने का अनुबंध किया है।
हिंद युग्म प्रकाशन के संस्थापक-संपादक शैलेष भारतवासी इसे हिंदी किताबों की डिप्रेशिंग दुनिया में एक राहत साँस बताते हैं, “मुझे लगता है कि आने वाले समय में हिंदी के लेखक भी अपनी किताबों की रॉयल्टी से एक ठीक-ठाक जीवन जी सकते हैं। हिंद युग्म अपने कई लेखकों को सालाना 2 लाख रुपये से अधिक की रॉयल्टी देता है। बहुत सारे लेखकों को ई-बुक की रॉयल्टी के तौर भी लाखों रुपये मिल रहे हैं। फ़िल्म इंडस्ट्री का ध्यान भी नए लेखकों की किताबों की ओर गया है, जिसकी वजह से किताबों के फ़िल्म निर्माण अधिकार, वेब सीरिज निर्माण अधिकार इत्यादि बिकने लगे हैं। अगर हिंदी की किताबें इसी तरह तमाम माध्यमों में अपनी जगह बनाती गईं, तो हिंदी किताबों और उनके लेखकों का भविष्य बहुत सुनहरा होगा”।
ग़ौरतलब है कि हिंद युग्म ने पिछले 5 सालों में हिंदी को बहुत सारे लोकप्रिय लेखक दिए हैं, जिन्होंने नए पाठकों का एक पुल बनाया है। जहाँ हिंदी की तमाम किताबें बिक्री के मामले में हज़ार की संख्या नहीं पार कर पातीं, वहीं नए लेखकों की किताबें 25 हज़ार तक बिक जाती हैं। हिंद युग्म का ‘नई वाली हिंदी’ नामक पाठक जोड़ो अभियान भी अत्यधिक सफल रहा है। आज एक सामान्य पाठक हिंदी में लिखी जा रही किसी भी क़िस्म की नई किताब को ‘नई वाली हिंदी’ से जोड़कर देखता है।
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