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नवाजुद्दीन सिद्दीकी द्वारा अभिनित फिल्म ‘मंटो’ जल्द ही सिनेमाघरो में रिलीज होने जा रही है, फिल्म 21 सितंबर को रिलीज होगी। हालांकि, फिल्म रिलीज से पहले कंट्रोवर्सी में फंसती जा रही है। लेकिन कंट्रोवर्सी फिल्म से जुड़ी नहीं है बल्कि एक किताब से जुड़ी है।
दरअसल, मंटो की डायरेक्टर नंदिता दास ने फिल्म ‘मंटो’ से जुड़ी एक किताब लॉन्च की है। इस किताब में 15 कहानियों दी गई है, जोकि हंदी और अंग्रेजी में जारी हुई है। लेकिन, विवाद किताब के कवर पेज से जुड़ा है। दरअसल, मंटो आधारित इस किताब के कवर पेज पर ‘नवाजुद्दीन’ की तस्वीर लगी है। हिंदी साहित्यकारों को यह बात बिल्कुल नहीं भा रही।
साहित्यकार इसे ईमानदार लेखक की हत्या बता रहे हैं।
साहित्यकारों ने नंदिता दास और किताब को पब्लिश करने वाली कंपनी को आड़े हाथ लेकर सावल किया है कि मंटो बड़े हैं या फिल्म में उनकी भूमिका करने वाला अभिनेता बड़ा नवाजुद्दीन सिद्दीकी? क्या नवाज मंटो से ज्यादा बड़े हैं?
हालांकि, इस पूरे मामले पर युवा साहित्यकारों और मंटो को पसंद करने वाले एक्टविस्ट का एक बड़ा समूह नंदिता, नवाज, फिल्म प्रॉडक्शन कंपनी वायकॉम और किताब पब्लिश करने वाली कंपनी राजकमल प्रकाशन की जमकर आलोचना कर रहा है।
राजकमल प्रकाशन ने अपनी तरफ से सफाई दी है और कहा, “आपके हमारे सबके मंटो की लिखी तमाम कहानियों में से नंदिता दास की चुनी हुई 15 कहानियों के संकलन का प्रकाशन राजकमल से हुआ है, जिसे न अभी बाजार में उपलब्ध कराया गया है और न इसकी कोई औपचारिक घोषणा हुई है। मंटो फिल्म के स्पेशल स्क्रीनिंग के मौके पर इस किताब के कुछ सैम्पल प्रतियां मुंबई में 5 सितंबर 2018 को जरूर वितरित हुई थीं जो अभी पूरी तरह तैयार नहीं थीं। दरअसल, यह किताब फिल्म के प्रॉडक्शन हाउस और राजकमल प्रकाशन का संयुक्त प्रयास है। इसका मकसद मंटो के साहित्य और उन पर बनी फिल्म को ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच पहुंचाना है। इसलिए किताब का फ्रंट कवर फिल्म के पोस्टर का ही कुछ बदला हुआ रूप है। किताब के बैक कवर पर फिल्म के प्रॉडक्शन हाउस का लोगो भी प्रकाशन के लोगो के साथ छपा है। यह किताब विशेष रूप से मंटो फिल्म के निर्माण के उपलक्ष्य में ही प्रकाशित हुई है। यह एक स्पेशल एडिशन भर है, न कि रेगुलर एडिशन।”
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