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आई कैन टॉक इन इंग्लिश, आई कैन वॉक इन इंग्लिश, आई कैन मेक अंडरस्टैंड यू इन इंग्लिश। बिकॉज इंग्लिश इज वैरी फनी लैंग्वेज। यहीं खत्म होती है न इस इंग्लिश की चर्चा, लेकिन गलत कही गई है ये लाईन, इंग्लिश एक फनी लैंग्वेज नहीं बल्कि हमारे हिंदुस्तान में एक स्टैंडर्ड की लैंग्वेज बन चुकी है।
हाईयर स्टडिज अगर इंग्लिश में होंगी तभी अच्छे कॉलेज में दाखिला मिलेगा। एक बेमिसाल नौकरी के लिए इंग्लिश आनी जरुरी है, वरना इंटरव्यू में ही बाहर कर दिए जाएंगें। आज के समय में हर अभिभावक अपने बच्चे का दाखिला इंग्लिश मिडियम में कराना चाहता है, लेकिन वो भी अब इतना आसान नहीं। अपने बच्चे के दाखिले के लिए अभिभावक को भी इंटरव्यू देना पड़ता है, उसमें ये देखते हैं कि अभिभावक को इंग्लिश आती है या नहीं।
चलो ये तो बात रही करियर की, अब बात करें हमारी मित्र मंडली की, ओह लगता है ज्यादा कह दिया मेरा मतलब है, आपके फैन्डस सर्किल से, जिनसे आप यूं ही मस्ती में पूछते हैं, ‘वॉट्स अप यार’। क्या कभी कोई पूंछता है ‘कुशलतापूर्वक हो मित्र’? तो आप कहेंगे कि इतनी हिन्दी कौन बोलता है, लेकिन फर्राटेदार इंग्लिश बोलने में तो आपकी जुबान कभी नहीं लड़खड़ाती।
आज का दिन 14 सितंबर हमारे देश में हिन्दी दिवस के रुप में मनाया जाता है, क्योंकि इसे हमारी राज्यभाषा का दर्जा आज के ही दिन सन् 1949 में मिला था। दुख की बात तो ये है कि इस भाषा का सम्मान सिर्फ एक ही दिन किया जाता है, बाकी दिन हिन्दी बोलने वालों का मजाक बनाया जाता है। अंग्रेज तो अंगेजी को शान से बोलते हैं न जाने क्यों हम अपनी राज्यभाषा को बोलने में शर्म महसूस करते हैं। हमें तो गर्व महसूस करना चाहिए कि हिन्दुस्तान में कुल 22 भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन इन सब में हिन्दी को राज्यभाषा के रुप में स्वीकार किया गया है।
अब तो कई इंग्लिश स्कूल् में भी हिन्दी को ऑप्शनल सब्जेक्त्स में रखा गया है, हमने अपनी हिन्दी भाषा के मूल्य खुद ही गिराया है। कौन कहता है कि हिन्दुस्तान आज अंगेजी शासन से आजाद हो चुका है, हां कह सकते कि व्यकि्तगत रुप से, लेकिन आज भी उनकी सभ्यता और भाषा के हम गुलाम हैं।
हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है, इसको सिर्फ आज के दिन के लिए ही नहीं बल्कि हर दिन इसे मनाना चाहिए। आज मैंने इस दिन के इतिहास के बारे में कोई बात नहीं की क्योंकि हिन्दी दिवस के दिन की घोषणा जिस समय में की गई थी, उस वक्त हिन्दी बोलने में कोई झिझकता नहीं था और इतिहास बीत चुका है, सवाल तो ये है कि जो आने वाला भविष्य है हम उसे कैसा बना रहें हैं, और शायद हम इसे एक हिन्दी मुक्त इंग्लिशतान बनाने की होड़ में लगे हैं। तो इसे समझो और इस देश हिन्दुस्तान बनाने की ललक में बढ़ो, क्योंकि हिन्दुस्तानी हैं हम, हिन्दी हैं हम।
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