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कई लोगो को गाड़ी चलाने का शौक होता है और उनको ग़ाड़ी चलाना आता भी है।वो हर जगह ,चाहे वह दूर क्यों न हो ,चाहे दूसरा शहर ही क्यों न हो खुद ग़ाड़ी चला कर जाना पसंद करते है।पर आज़ इन लोगों में ऐसे भी होते है जिनके पास खुद की गाड़ी नहीं होती।ऐसे में वह किराये की गाड़ी लेते है जिसको रेंट कार भी कहते है।
अगर आपको किराये पर ग़ाड़ी लेना अच्छा और आसान लगता है तो पहले इन बातों पर गौर करें।
ऐसी बहुत सी कंपनियां होती है जो आपको किराये पर कार देती है।बस आपको वहां जाना है, कुछ फार्म भरने होते है और किराया देना होता है।उसके बाद आप एक दिन या एक से ज़्यादा दिन के लिए ग़ाड़ी किराये पर ले सकते है।
ग़ाड़ी रेंट पर लेने में मज़ा तो है पर कुछ बातों का ख्याल रखना भी ज़रूरी होता है और वो बाते ये है।
किराया-ग़ाड़ी रेंट पर लेने में आपको कंपनी को या मालिक को किराया देना होता है।ये हिसाब कंपनी हर घंटे से लेती है।टाइम ज़्यादा हो गया तो पैसे भी ज़्यादा देने पड़ेंगे।इस में अधिकतर पेट्रोल के पैसे नहीं जोड़े जाते है।
अलग से चार्ज-कंपनी आपसे ग़ाड़ी के अलावा और चीजों के लिए भी पैसे ले सकती है।डिपोजिट के लिए,किसी तरह के नुक्सान के पैसे,सेक्युरिटी के पैसे आपसे ले सकती है।अगर ग़ाड़ी को कोई नुक्सान पहुंचा तो उसके भी आपको बाद में पैसे भरने होंगे।
हर ग़ाड़ी की अपनी विशेषता है।बाजार में अलग अलग ब्रॉड की गाड़ियां मौजूद है।आप अपने हिसाब और पसंद से ग़ाड़ी चुन सकते है।आपको डीज़ल ग़ाड़ी चाहिए या पेट्रोल की,ज़्यादा सीट की चाहिए या छोटी,मैनुअल चाहिए या ऑटोमैटिक, आपको सभी ऑप्शन मिल जायँगे।
ग़ाड़ी लेने से पहले आप उसके सभी पुर्ज़ों की जांच कर ले।बीच रास्ते में अगर ग़ाड़ी में कुछ प्रॉब्लम आ जाये तो आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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