Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
हमारे देश में समलैंगिकता को लेकर आज कल बहुत बड़ी बहस चल रहीं है, तो इस को लेकर भारत की सर्वोच्च न्यायालय भी गम्भीर है। अभी तक हमारे देश मे समलैंगिकता एक कानूनी अपराध हैं और समलैंगिक संबंध बनाने पर कठोर सजा का प्रावधान है।
जानिए क्या है समलैंगिकता-
समलैंगिकता को हम अंग्रेजी में बायोसेक्स भी कह सकते हैं बायोसेक्स का अर्थ ये होता हैं कि एक पुरुष का दूसरे पुरुष औऱ एक महिला का दूसरे महिला के साथ अप्राकृतिक रूप से यौन सम्बंध बनाना ही समलैंगिकता की परिभाषा को बतलाता है।
भारत जैसे देश में यह एक कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है। भारत न्याय व्यवस्था में आईपीसी के सेक्शन 377 में इसका उल्लेख किया गया हैं। ऐसे तो ये कानून लगभग 150 साल पुराना महारानी विक्टोरिया के समय से है जो आज भी हमारे देश में चल रहा हैं। इस अपराध के करने वालों को सजा के लिए उम्रकैद या फिर जुर्माने के साथ 10 वर्ष की कठोर सजा का प्रावधान है।
विश्व के लगभग 25 देशों में समलैंगिकता के अधिकार की अनुमति मिल गई हैं, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे प्रमुख देश हैं, वही भारत जैसे देश मे समलैंगिकता एक कानूनी अपराध हैं।समलैंगिकता को लेकर भारत की सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ इस मामले में सुनवाई के रहीं।
पिछले तीन दिनों के सुनवाई के दौरान माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने ये संकेत दे दिए है कि वह आईपीसी की धारा 377 को समाप्त कर समलैंगिकों को एक साथ जीने का अधिकार देगी। कोर्ट ने इससे पहले अपने आदेश में कह ही दिया है कि जीवन साथी चुनने के अधिकार को ही जीवन जीने का अधिकार पहले ही दे चुकी हैं, तो यही तर्क इस अधिकार पर भी इस्तेमाल किया जा सकता हैं।
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop एप, वो भी फ़्री में और कमाएं ढेरों कैश वो भी आसानी से
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.