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FIR यानी की रजिस्ट्रेशन की पहली इंफॉर्मेशन रिपोर्ट जिसमें सीआरपीसी की धारा- 154 के तहत एफआईआर दर्ज करवाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2013 के आदेश के अनुसार ये उन केस में भी लागू होता है जिसमें प्रारंभिक जांच मुमकिन नहीं है। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करवाने के क्या फायदे और नुकसान हैं।
Online FIR के नुकसानः
कई लोगों को पुलिस के सामने झूठ बोलने में दिक्कत होती है अगर हम इसको कंप्यूटर स्क्रीन से तुलना करें तो कोई भी ऑनलाइन का सहारा लेकर किसी की इमेज खराब कर सकता है। वहीं ये उन लोगों के लिए कारगर नहीं है जिनके पास इंटरनेट की काफी कम सुविधा है। अगर सभी लोग ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करवाने लगें तो ऑनलाइन बाढ़ आ सकती है।
आपको बता दें कि भारत की 10 प्रतिशत आबादी फेक केस में लोगों पर एफआईआर करवाती है जिसमें पॉलिटिकल विरोधी केस, जाति और दूसरे केस शामिल हैं।
Online FIR के फायदेः
ऑनलाइन एफआईआर की मदद से लोगों के पास अपनी कॉपी पर कंट्रोल होता है जिसमें पुलिस ना नहीं कह सकती है। अक्सर लोगों को पुलिस के पास जाने में असहजता और डरा हुआ महसूस करते हैं। जिसके बाद उन्हें ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करवाने में काफी आसानी होगी।
महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार को देखते हुए, ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करवाना महिलाओं के लिए काफी आसान हो जाएगा।
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