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उत्तरी दिल्ली में करीब 1200 से ज़्यादा मोबाइल टावर ऐसे है जो बिना इजाज़त के लगे हुए है। अब सरकार के सामने ये बड़ी दिक्कत है की अगर इन टावरों को बंद करे तो लोगो को मोबाइल कनेक्टिविटी की दिक्कत होगी और अगर बिना इजाज़त चलने दिया तो इसे कानून इजाज़त नही देगा।
ऐसे में सरकार ने ये फैसला लिया है कि अब इन अवैध मोबाइल टॉवर को कानून से वैध करने का एक मौका दिया जाए।इस टावरों से पूरी फीस वसूलकर इनको लाइसेंस दे दिए जाएंगे। सरकार का दावा है की अब इन टावरों को वैध को करना सही है क्योंकि दिल्ली में काल ड्राप की दिक्कत ज़्यादा है जिससे निजात ज़रूरी है।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्थाई समिति की अध्यक्ष वीना विरमानी ने कहा कि अवैध मोबाइल टावरों को नियमित करने का जल्द ही मौका दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि दिल्ली में कॉल ड्राप की समस्या से हर कोई परेशान है। इसी परेशानी को कम करने के लिए निगम ने सील मोबाइल टावरों के साथ अवैध मोबाइल टावरों को वैध करने का फैसला लिया गया है।
उन्होंने बताया कि वह उन टावरों को फिर से शुरू करने का मौका देना चाहती है, जिन्हें अवैध रूप से संचालन किए जाने के चलते निगम द्वारा सील किया गया था। अध्यक्ष ने बताया कि उत्तरी निगम क्षेत्र में 2539 मोबाइल टावर लगे हैं। इनमें से 1284 निगम की बिना इजाजत के चल रहे हैं।
1255 मोबाइल टावर निगम की इजाजत से चल रहे हैं। 127 टावर ऐसे हैं जो निगम ने सील किए थे। निगम अवैध टावरों को वैध करने का मौका देगी तो इससे निगम के राजस्व में 30 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी।
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