Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
महिलाओं के लिए गर्भधारण करना और अपनी संतान को जन्म देना यह बहुत की हर्ष का समय होता है। एक पति और पत्नी दोनों के लिए यह समय बहुत ही खुशी का होता है। जिससे समाज में सम्मान और मन मे संतुष्टि की प्राप्ति होती है। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि महिलाओं का अचानक से ही प्राकृतिक रूप से गर्भपात हो जाता है जिसका इल्ज़ाम महिलाएं स्वंय को देने लगती हैं। लेकिन एक रिसर्च में पाया गया कि साधारण तौर पर महिलाओं में इस तरह की स्थिति गर्भ धारण करने के 19 सप्ताह बाद होती है और जिन महिलाओं ने अपनी आयु चालीस के पार कर ली है उनमें ऐसा ज़्यादा देखा जाता है।
चालीस की उम्र के बाद महिलाओं में कमज़ोरी आ जाना भी इसका कारण पाया गया और ऐसी महिलाओं में साधारण महिलाओं की तुलना में गर्भपात की समस्या पच्चीस गुना अधिक पायी गयी। दरअसल महिलाओं के गर्भ धारण करने के उन्नीस सप्ताह बाद यदि सही प्रकार से भ्रूण विकसित नहीं हो पाता तो इस स्थिति में शरीर प्राकृतिक तरीके से भ्रूण को निष्कासित कर देता है। ऐसा होने के बहुत सारे कारण होते हैं इसका यदि ध्यान रखा गया तो इस खतरे को बहुत कम किया जा सकता है।
गर्भपात के कारण : देखा गया है कि कुछ मामलों में डायबिटीज़ या अन्य कोई एंडोक्रिनोलॉजिकल डिसऑर्डर की वजह से भी गर्भपात हो सकता है। इसके अलवा बहुत ज्यादा मात्रा में एल्कोहल, कैफीन या सिगरेट के सेवन से भी गर्भपात की संभावना बनती है। गर्भपात के कई सारे कारण होते हैं। गर्भवती महिला को स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो तो भी गर्भपात की संभावना बनी रहती है। गर्भपात के बहुत से मामलों में माता-पिता में से किसी एक के गुणसूत्रों में असामान्यताएं भी वजह बनती हैं। फाइब्रॉइड, यूटेरिन पर्फोरेशन, संक्रमण, गर्भाशय की दीवारों के कमजोर हो जाने आदि वजहों से भी गर्भपात हो सकता है।
लक्षण - इसमें देखा गया है कि कुछ लक्षण सामने दिखाई देते हैं जिन्हें पहचानना जरूरी होता है। इनमें योनि से खून का रिसाव तथा लगातार निचले हिस्से में दर्द, वेजाइना से सेमी-सॉलिड पदार्थ का रिसाव ।
बचाव के उपाय -
1 ऐसा देखा गया है कि जब गर्भवती महिला तनाव में होती है तो ऐसी स्थिति ज़्यादा उत्पन्न होती है इस के कारण शरीर पर बोझ आ सकता है। ऐसे में स्ट्रेस फ्री जीवन जीना बहुत महत्वपूर्ण है। इस स्थिति में बहुत अधिक काम न करें और तनाव मुक्त रहें ।
2 कुछ घरेलू उपाय भी गर्भपात के खतरे को कम कर सकते हैं। त्रिफला चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है जो महिलाओं में तमाम दोषों को दूर करती है तथा असंतुलन को ठीक करती है। गर्भधारण के पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श कर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है और इस खतरे से आसानी से बचा जा सकता है ।
3 इस दौरान पौष्टिक आहार लें। ऐसा आहार लें जो आसानी से पच जाए। ऐसा आहार स्वस्थ आहार होता है। इस दौरान मसालेदार, बासी खाना तथा तैलीय खाद्य पदार्थों से परहेज करें। गर्भ अवस्था में ज़्यादातर हरी सब्ज़ियों का इस्तेमाल करे, साथ ही कुछ ताज़ा फलों को भी अपने खाने में शामिल करें ।
4 खतरे को कम करने के लिए व्यायाम करना बहुत अच्छा साबित हो सकता है । इस स्थिति में मेडिटेशन व्यायाम करना चाहिए। इससे स्वास्थ बेहतर रहता है शरीर में चुस्ती रहती है और प्राकृतिक गर्भपात की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है । सुबह के समय हल्का वाक भी करना शरीर के लिए अच्छा होता है
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop एप, वो भी फ़्री में और कमाएं ढेरों कैश वो भी आसानी से
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.