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सावन का पवित्र महीना चल रहा है। जहां देखो वहां कांवड़ लिए कावड़िए नज़र आ जाते हैं। वहीं मंदिरों में बम-बम भोले की गूंज सुनाई दे रही है। लेकिन एक गांव ऐसा है जहां सावन आते ही मातम छा जाता है। मंदिरों की तो बात ही छोड़ दीजिए यहां तो घरों में भगवान शिव की पूजा नहीं होती। सुनने में ये थोड़ा अजीब सा लगता है लेकिन ये बात सौ फीसदी सच है। हम बात कर रहे हैं गुरुग्राम के गांव बाघनकी की। बाघनकी गांव का शिवलिंग पिछले 9 साल से गंगाजल का इतजार कर रहा है। साल दर साल बीतते जा रहे हैं लेकिन शिवलिंग का इंतजार खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा।
अब आप सोच रहे होंगे आखिर यहां के लोगों को भगवान शिव से ऐसी नाराजगी क्यों है। तो हम आपको इसके पीछे की वजह भी बता देते हैं। दरअसल साल 2010 से पहले तक यहां पर भगवान शिव की पूजा होती थी। यहां के शिवालयों में भी बम-बम भोले की गूंज सुनाई देती थी। लेकिन एक हादसे ने सबकुछ बदल कर रख दिया। हर साल की तरह साल 2010 में भी गांव के 22 नौजवान के साथ 24 लोग गंगाजल लाने के लिए कांवड़ लेकर निकले थे।
लेकिन ये दल गुप्तकाशी में एक सड़क हादसे का शिकार हो गया। गांव में एकसाथ 22 नौजवानों के शव पहुंचे। गांव के हर व्यक्ति की आंखों में आंसू थे और भगवान शिव के लिए गुस्सा। उसके बाद से ही यहां के लोग शिव से ऐसे रूठे कि आजतक नहीं मान पाए हैं। गांव में न तो भगवान शिव की पूजा होती है और न ही यहां की महिलाएं शिवरात्री का व्रत रखती है। गांव का शिव मंदिर तो जैसे खंडर हो गया है। अब न जाने भगवान शिव को यहां के लोगों की भक्ति के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा।
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