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बॉलीवुड की ट्रेजेडी क्वीन ‘मीना कुमारी’ की आज 85वीं जयंती है। मीना कुमारी का जन्म 1 अगस्त 1933 को हुआ था। मीना कुमारी ने अपने सौंदर्य और जज्बात से हिंदी फिल्मी जगत में हसीन लम्हें दिए है और कभी न भूलने वाली पहचान बनाई है।
हालांकि, मीना कुमारी ने एक अभिनेत्री के रूप में अच्छी खासी पहचान बनाई हों, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि मीना कुमार एक बेहतनी शायरा भी थीं।
मीना कुमारी को शेरों-शायरी का काफी शौक था। आज मीना कुमारी की जयंती पर हम आपको उनकी कलम से लिखे कुछ अलफ्जों से रूबरू कराने जा रहे हैं:-
यहां सुनिए मीना कुमारी की आवाज में उनकी गलज-
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यह गज़लें भी जीत लेंगी आपका दिल
“आबला-पा कोई इस दश्त में आया होगा... वर्ना आँधी में दिया किस ने जलाया होगा... ज़र्रे ज़र्रे पे जड़े होंगे कुँवारे सज्दे... एक इक बुत को ख़ुदा उस ने बनाया होगा..... प्यास जलते हुए काँटों की बुझाई होगी... रिसते पानी को हथेली पे सजाया होगा... मिल गया होगा अगर कोई सुनहरी पत्थर... अपना टूटा हुआ दिल याद तो आया होगा... ख़ून के छींटे कहीं पूछ न लें राहों से... किस ने वीराने को गुलज़ार बनाया होगा”
“चाँद तनहा है, आस्मां तनहा.... दिल मिला है कहाँ कहाँ तनहा चाँद... तनहा है बुझ गई लौ छुप गया तारा... घरघराता रहा धुआँ तनहा चाँद तनहा... है ज़िंदगी क्या इसी को कहते हैं जिस्म तनहा है और जां तनहा.... चाँद तनहा है.... हमसफ़र कोई ग़र मिले भी कहीं... दोनों चलते रहे तनहा... चाँद तनहा है... जलती बुझती सी रोशनी के तारे... सिमटा-सिमटा सा एक मकां तनहा... राह देखा करेगा सदियों तक.... छोड़ जाएंगे ये जहाँ तनहा...”
“उदासियों ने मिरी आत्मा को घेरा है.... रू पहली चाँदनी है और घुप अंधेरा है... कहीं कहीं कोई तारा कहीं कहीं जुगनू... जो मेरी रात थी वो आप का सवेरा है... क़दम क़दम पे बगूलों को तोड़ते जाएँ... इधर से गुज़रेगा तू रास्ता ये तेरा है.... उफ़ुक़ के पार जो देखी है रौशनी तुम ने... वो रौशनी है ख़ुदा जाने या अंधेरा है... सहर से शाम हुई शाम को ये रात मिली... हर एक रंग समय का बहुत घनेरा है... ख़ुदा के वास्ते ग़म को भी तुम न बहलाओ... इसे तो रहने दो मेरा यही तो मेरा है...”
Author- Manisha Rajor
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