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‘बिंदिया चमकेगी’... रे रेश्मी जुल्फे... जय-जय शिव शंकर... इन सभी गानों में एक बात कॉमन है वो हैं ‘मुमताज’... बॉलीवुड की खूबसूरत अदाकारा में से एक मुमताज आज अपना 71वां जन्मदिन मना रही हैं। इस खास मौके पर उनके दोस्तों और रिश्तेदारों के अलावा चाहनेवाले भी दुनियाभर से उन्हें शुभकामनाएं भेज रहे हैं। मुमताज ने महज 12 साल की उम्र में अपने अभिनय के करियर की शुरुआत कर ली थी। इसके बाद उन्होंने बतौर अदाकारा एक के बाद एक कई सुपरहिट फिल्में दी हैं। उनकी खूबसूरती और अभिनय में इतनी कशिश थी कि लोग उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की मर्लिन मनरो कहने लगे थे।
एक ऐसा भी वक़्त था जब मुमताज़ हिंदी फ़िल्में में बतौर एक्सट्रा काम करती थी। घर की माली हालत ख़राब होने की वजह से उन्होंने महज़ 12 साल की उम्र में फ़िल्मों में काम करना शरु कर दिया था। बतौर बाल कलाकार मुमताज़ की पहली फिल्म संस्कार (1952) थी। इसके बाद उन्होंने यासमीन (1955), लाजवंती (1958), सोने की चिड़िया (1958) और स्त्री (1961) में काम किया।
मुमताज़ को पहला बड़ा रोल ओपी रल्हन की मूवी गहरा दाग़ में मिला जिसमें उन्होंने बहन की बूमिरका निभाई थी। इसके बाद वह मधुबाला के पिता अताउल्लाह ख़ान की फिल्म में पठान में हिरोईन बनी लेकिन फिल्म पूरी ही नहीं हुई। मुमताज़ इस दौरान छोटेमोटे रोल करती रही और फिर बी ग्रेड की फिल्मों की सफल स्टार बन गई। उनके हीरो ज़्यादातर दारा सिंह हुआ करते थे जिनके साथ उन्होंन 10 हिट फिलमें की।
मुमताज़ को बड़ा ब्रेक 1969 में दो रास्ते फिल्म में मिला जिसमें वह राजेश खन्ना की हिरोईन बनी। आपको बता दें कि अराधना के रिलीज़ होने के बाद राजेश खन्ना सुपरस्टार बन चुके थे। राजेश खन्ना की अगली दो फिल्म दो रास्ते और बंधन में भी मुमताज़ ही हिरोईन थीं। इन दो फिल्मों के रिलीज़ होने के बाद मुमताज़ सबसे महंगी अदाकारा बन गईं। उन्होंने 1970 से लेकर 1976 तक इंडस्ट्री पर राज किया। इस दौरान उन्होंने बड़ी बड़ी अदाकारों की छुट्टी कर दी।
मुमताज़ ने 14 साल के अपने फिल्मी करिअर में 100 से ज़्यादा फिल्मों में काम किया और उनकी हर फिल्म यादगार रही। 1970 में आई खिलौना फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड मिला। इसके बाद 1997 में उन्हे फिल्मफ़ेयर लाइफटाइम अवार्ड से नवाजा गया।
आज उनके जन्मदिन के खास मौके पर हम आपके सामने पेश करने जा रहे हैं उनके बेहतरीन गाने जो आज भी अक्सर लोगों की जुबां पर सुनने को मिल जाते हैं।
ये रेश्मी ज़ुल्फ़ें (दो रास्ते)
बिंदिया चमकेगी (दो रास्ते)
यूं ही तुम मुझसे बात करती हो (सच्चा झूठा)
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे (ब्रह्मचारी)
जय जय शिवशंकर (आपकी क़सम)
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