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नसीरुद्दीन शाह, जिन्हें हिंदी फ़िल्म उद्योग में अदाकारी का एक पैमाना कहा जाए तो शायद ही किसी को एतराज हो। नसीर की काबिलियत का सबसे बड़ा सुबूत है, सिनेमा की दोनों धाराओं में उनकी कामयाबी। आज नसीरूद्दीन शाह अपना 68वां जन्मदिन मना रहे हैं।
नसीरूद्दीन शाह का जन्म 20 जुलाई 1950 में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। नसीरूद्दीन शाह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और फिर उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लिया।
अभिनय के इस प्रतिष्ठित संस्थान से अभिनय का गुण सिखने के बाद वे रंगमंच और हिन्दी फ़िल्मों में सक्रिय हो गए।
नसीरूद्दीन का फिल्मी करियर-
नसीरूद्दीन शाह ने अपने करियर की शुरुआत फ़िल्म निशांत से की थी जिसमें उनके साथ स्मिता पाटिल और शबाना आजमी जैसी अभिनेत्रियां थीं। ‘निशांत’ एक आर्ट फ़िल्म थी। यह फ़िल्म कमाई के हिसाब से तो पीछे रही पर फ़िल्म में नसीरुद्दीन शाह के अभिनय की सबने सराहना की। इस के बाद नसीरुद्दीन शाह ने आक्रोश, ‘स्पर्श’, ‘मिर्च मसाला’, ‘अलबर्ट पिंटों को गुस्सा क्यों आता है’, ‘मंडी’, ‘मोहन जोशी हाज़िर हो’, ‘अर्द्ध सत्य’, ‘कथा’ आदि कई आर्ट फ़िल्में कीं।
आर्ट फ़िल्मों के साथ वह व्यापारिक फ़िल्मों में भी सक्रिय रहे। ‘मासूम’, ‘कर्मा’, ‘इजाज़त’, ‘जलवा’, ‘हीरो हीरालाल’, ‘गुलामी’, ‘त्रिदेव’, ‘विश्वात्मा’, ‘मोहरा’, सरफ़रोश जैसी व्यापारिक फ़िल्में कर उन्होंने साबित कर दिया कि वह सिर्फ आर्ट ही नहीं कॉमर्शियल फ़िल्में भी कर सकते हैं। नसीरूद्दीन शाह के फ़िल्मी सफर में एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्होंने मसाला हिन्दी फ़िल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कोई हिचक नहीं दिखायी। वक्त के साथ नसीरूद्दीन शाह ने फ़िल्मों के चयन में पुन: सतर्कता बरतनी शुरू कर दी। बाद में वे कम मगर, अच्छी फ़िल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगे।
नसीरूद्दीन शाह ने एक फ़िल्म का निर्देशन भी किया है। हाल ही में वह “इश्किया”, “राजनीति” और “जिंदगी ना मिलेगी दुबारा” जैसी फ़िल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेर चुके हैं।
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