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हिंदी के प्रख्यात गीतकार गोपालदास नीरज का गुरुवार शाम 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वह लम्बे समय से काफी बीमार चल रहे थे। आगरा में इलाज के बाद उन्हें बुधवार को एम्स में शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन अचानक गुरुवार को उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी और उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है।
गोपालदास नीरज का जन्म 4 जनवरी 1925 को हुआ था। कवि सम्मेलनों में अपार लोकप्रियता के चलते नीरज को बम्बई के फिल्म जगत ने गीतकार के रूप में नई उमर की नई फसल के गीत लिखने का निमन्त्रण दिया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। पहली ही फिल्म में उनके लिखे कुछ गीत जैसे कारवाँ गुजर गया गुबार देखते रहे और देखती ही रहो आज दर्पण न तुम, प्यार का यह मुहूरत निकल जायेगा बेहद लोकप्रिय हुए जिसका परिणाम यह हुआ कि वे बम्बई में रहकर फ़िल्मों के लिये गीत लिखने लगे।
फिल्मों में गीत लेखन का सिलसिला मेरा नाम जोकर, शर्मीली और प्रेम पुजारी जैसी अनेक चर्चित फिल्मों में कई वर्षों तक जारी रहा। किन्तु बम्बई की ज़िन्दगी से भी उनका जी बहुत जल्द उचट गया और वे बंबई को अलविदा कहकर फिर अलीगढ़ वापस लौट आये।
भले ही उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया हो, लेकिन उनके सदाबहार हमेशा उनके चाहने वालों के दिलों में जिंदा रहेंगे।
ऐ भाई जरा देख के चलो
कल का पहिया
मेरा मन तेरा प्यासा
दिल आज शायर है
शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब
लिखे जो खत तुझे
Author- Manisha Rajor
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