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मच्छी भात के अलावा कोलकाता दुर्गापूजा के त्योहार के लिए भी का फेमस है। यहां दशहरे पर एक अलग ही रौनक रहती है। यहां 9 दिनों तक चलने वाली पूजा प्रक्रिया देश के बाकी हिस्सो से बिलकुल अलग होती है। अगर आपके पास छुट्टियां है और आप उन छुट्टियों में कही घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो कोलकाता आइए और इस दशहरें की रौनक में आप भी खो जाइए।
कालीघाट मंदिर
दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में कालीघाट की बात हो या फि बात हो दक्षिणेश्वर काली मंदिर की, रौनक आप हर ओर देख सकेंगे। यहां होली के बाद नवरात्रि में सिंदूर खेला तक एन्ज्वाय कर सकते हैं। कोलकाता का कालीघाट मंदिर देश के 51 शक्ति पीठों में से एक है। हुगली नदी के तट पर बने इस मंदिर की एक अलग ही पहचान है। मान्यता है कि कालीघाट में मां सती के दाहिने पांव की चार अंगुलियां गिरी थीं। कालीघाट मंदिर में देवी मां की मूर्ति में काली का मस्तक के साथ साथ चार हाथ नजर आएंगे। इस मूर्ति को काले पत्थर से तैयार किया गया है।
दक्षिणेश्वर काली मंदिर
वहीं कोलकाता में गंगा नदी के तट पर है दक्षिणेश्वर काली मंदिर। ये मंदिर काफी भव्य है। इस मंदिर तक पहुंचने के ले आपको काफी वक्त लगेगा लेकिन सफर यादगार होगा। इस मंदिर में को साल 1855 में बनाया गया था। यहां मां काली की मूर्ति है जोकि नवरत्न की तरह निर्मित है। इसके अलावा आप कोलकाता में दशहरें के दौरान एक से बढ़कर एक पांडाल देख सकेंगे जो इस शहर की रौनक में चार चांद लगाने का काम करते है। तो वक्त निकालिए और आइए कोलकाता।
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